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जिम्मेदारी . . . कैसे 🤔भाग🏃 जाऊ मैं , छोर कर जिम्मेदारियों को , टिकी 🧐है निगाहें सभी की , कैसे तोर 💔जाऊ मैं, वो पिरोए 💝हुए ...
एक कवि नदी के किनारे खड़ा था ! तभी वहाँ से एक लड़की का शव नदी में तैरता हुआ जा रहा था। तो तभी कवि ने उस शव से पूछा ---- क...
गौरेया बचाना बच्चों . . . नन्ही गौरेया आती है, इत उत वो निहारती है । चुग्गा चोंच में वो दबाती, भोली मुस्कान वो वारती ।। नन्हें न...
कहती प्यारी राधिका . . . खिलती प्यारी चाँदनी ,चाँद साजना मीत। पूरी होती कामना,बनी साधना प्रीत।। झिलमिल चमके चाँदनी ,देख बावरें नै...
भीगी पलकें . . . मेरी भीगी पलकें अक्सर,,तुम्हे ढूँढती हैं कब आओगे,, शबरी के राम जैसे तुम,,, मेरे प्रियवर,,, बोलो,,,,। हर पल ,हर लम...
मोहब्बत का दर्द . . . मोहब्बतों से मेरा कोई वास्ता नहीं था! मुझे तो याद चाहतों का रास्ता नहीं था!! तुम आये तो ज़िन्दगी मुस्कुराई थी! फ़ि...
हिंदी दिवस 14 सितम्बर है भारतीय संस्कृति की आत्मा ये हिंदी है वतन हिंदुस्तान हमारा, हम ही हैं ये हिंदी, है गुलिस्ताँ ...
रुकना नहीं है अब . . . अपने पैरों को समझा दो, अपने मन को मना दो। कि रुकना नहीं है अब, कि झुकना नहीं है अब। हरेक दर...
हर रोज क्यों लोग शादाब सज्र काटते है, इस दौर में लोग घर में भी घर काटते है। बदजुवानों का बढ़ गया रुतबा भी इस क़द्र, भाई ...
सद्भावना दिवस . . . २०अगस्त भारत के दिवंगत भूतपूर्व प्रधानमंत्री सम्माननीय श्री राजीव गांधी जी की स्मृति में मनाया जाता है,ज...
माँ का प्यार . . . तुने मुझको इतना दुलारा, हूँ मैं तेरा सबसे प्यारा। भूखे पेट कभी तुने सोने नहीं दिया मुझको, ख़ुद आँसू बहा ली मगर ...
हार मत मानना . . . तू गिर गया तो क्या? उठकर चलना सिख। कब तक दूसरों का इतिहास पढ़ेगा? अब ख़ुद अपना इतिहास लिख। अपना जीवन गुजार मत, दूसरों ...
मैं यह ठान लिया हूँ . . . कुछ अलग करना है अब मुझे, मैं यह ठान लिया हूँ। अभी पहुंचा नहीं हूँ मंजिल पर, अभी तो बस उड़ान लिया हूँ। कोई साथ नहीं ...
ऐ राही! तू चलता जा . . . ऐ राही! तू मेरी बात सुन, अपनी राह तू ख़ुद चुन। जितनी बार तु गिरे, उतनी बार तू संभलता जा, ऐ राही! तू चलता जा। जैसे सू...
सफलता . . . जो गिरते ही फूट जाए, वो मिट्टी का घड़ा नहीं हूँ। हां, गिरा मैं जरूर हूँ, परंतु मैं हारा नहीं हूँ। अपनी कठिनाइयों से स्वयं लड़ूं, इ...
हल खींचते समय यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होता था तो किसान कुछ देर के लिए हल चलाना बन्द करके बैल के मल-मूत्र त्यागने तक खड़ा...
मरते-मरते रही बस यही आरज़ू, अपनी जां को मैं वतन पे वार दूं। रगों में बहते एक एक बूंद की कसम, आज सैनिक होने का मैं कर्ज उतार दूं...
आज़ादी- कश्मीर और नागालैंड 75 वर्ष हो चुके आज़ादी के, फिर भी तिरंगे को लेकर सवाल क्यों? एक देश में एक ही झंडा हो, फिर कश्मीर और नागालैंड मे...
Domestic Violence घरेलू हिंसा . . . बिखरे हुए थे बाल उसके काजल में फिर आज कालिका छाई थी हैं लाल बहुत ही आंखें उसकी क्या रात उसने फिर मार खाई...
